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Monday, 13 May 2019

तुम_छेड़ो__हम_देखेंगे!


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#तुम_छेड़ो__हम_देखेंगे!"
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दिन दहाड़े, खुली सड़क पर #बलात्कार होता है और लोग कुछ नहीं करते. क्या इस पर हमें हैरान होना चाहिए? जब #द्रौपदी की साड़ी उतारी गयी थी, तब भी कहां किसी ने कुछ किया था!
दिन दहाड़े, खुली सड़क पर बलात्कार होता है और हम सोचते हैं कि लोग कुछ नहीं करते.......
नहीं रे बहुत कुछ करते हैं.. #वीडियो बनाते हैं, तकनीक ने लोगो के हाथ में ये जो #खिलौनाथमा दिया है, उसका इस्तेमाल तो करना ही होगा ना. कभी #अश्लील वीडियो देख कर, तो कभी अश्लील वीडियो बना कर।
सरे आम इस तरह रेप हो सकता है, ये पढ़ कर रूह कांप उठती है. सोचो अगर आप वहां होते तो क्या करते, तो लोग जवाब भी यही देते हैं कि हम किसी #पंगे में नहीं पड़ेंगे, चुपचाप वहां से निकल जाएंगे.
यह किस तरह के समाज में जी रहे हैं हम? छोटी मोटी #छेड़छाड़ को नजरअंदाज करते करते आज खुले आम सड़क पर बलात्कार की स्थिति पैदा हो गयी है।
यानि एक महिला होने के नाते अगर आप आवाज उठा दें, तो कभी आप अपने #घर का, कभी #समाज का, तो कभी देश का नाम #बदनाम कर रही हैं. लेकिन जो लोग आप के साथ ये हरकत कर रहे हैं या हो रही हरकत को देख कर नजरअंदाज कर देते हैं, उनका इस बदनामी में कोई योगदान नहीं है।
इस तरह की #टिप्पणियों से लोगों की यह दलील भी समझ में आने लगती है कि वे #बेटियों के पैदा होने से इसलिए डरते हैं कि आखिर उनकी #हिफाजत कौन करेगा. एक बच्ची की मां को पल पल उसकी हिफाजत की चिंता लगी रहती है. जब कोई उसे #गोद में उठाता है, तो माँ की नजरें उनकी #उंगलियों को ध्यान से देख रही होती हैं।
सरकार #बेटी_बचाओ__बेटी_पढ़ाओ के सिर्फ नारे ही दे सकती है. लेकिन जब तक लोगों की #मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक कोई सरकार किसी बेटी को नहीं बचा सकेगी. और मानसिकता तो यही है:----
"तुम छेड़ो, हम देखेंगे."

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