
आज के युग मे औरत कमज़ोर नही होती उसको अपने जीवन मे बोलने का अपनी जीवन मे खुश रहने का पूरा हक हैं !
हाँ हूँ मैं शिक्षित
#हाँ मालूम हैं मुझे अपने अधिकार
हाँ जानती हूँ मैं कि शोषण करने वाले से बड़ा गुनहगार सहने वाला होता हैं .....
कई बार कदम रखती हूँ देहलीज के बाहर कि आवाज़ उठाऊ शोषण के खिलाफ ,
पर याद आ जाता हैं कि ....
मैं एक महान और सिद्धांतवादी पिता की बेटी हूँ
मैं एक आदर्शवादी माँ की बेटी हूँ
मैं समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाएँ भाई की बहन हूँ
मैं अपनी प्यारी भतीजियों की प्यारी बुआ हूँ
फिर कैसे मैं अपनी वजह से उनके दामन में दाग लग़ा दूँ ,इसलिये अक्सर कदम रुक जाते हैं ....
हाँ मैं अपने अधिकार जानती हूँ पर चुप हूँ क्योंकि
मैं एक बेटी हूँ ,बहन हूँ ,बुआ हूँ और शायद दो घरों की इज्जत हूँ बस यही मेरी कमजोरी हैं पर कमज़ोर नहीँ हूँ मैं ......!!
"बेटियाँ खुद टूट जाती है ,पर अपने मा -बाप का मान नही टूटने देती

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