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Sunday, 12 May 2019

महाराणा प्रताप के देहान्त के कुछ वर्षों बाद लिखे गए ग्रन्थ 'राणा रासौ' में लिखा है


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"राणा प्रताप सोनगिरी रानी से उत्पन्न हुआ और संसार में अद्वितीय वीर माना गया | वह दानी एवं युद्ध में शत्रुओं को दलने वाला था | प्रतापसिंह अपना प्रताप स्वयं फैलाने वाला था | उसमें अक्षुण्ण रजोगुण विद्यमान था | इस संसार में जैसा राणा प्रताप हुआ है, वैसा ना अब तक कोई हुआ और न कभी होगा | राणा प्रताप युधिष्ठिर के समान सत्यवक्ता, दधीचि के समान उदारवृद्धि, दशरथ के समान पुरुषार्थी, भीम के समान युद्ध करने वाला, रावण के समान स्वाभिमानी एवं राम के समान प्रणपालक था | वह भारतवर्ष में विक्रम, भोज, कर्ण व सूर्य स्वरुप माना जाता है | राजागण उसको अपना शिरोमणि मानते थे | प्रताप नरेश हिन्दुओं का अडिग ताज था | हे प्रताप तुम युग-युग जीवित रहो | तुम्हारे स्मरण मात्र से पाप दूर हों | तुम भगवान एकलिंग के द्वितीय अंग माने जाते रहो, हिन्दुओं के पिता बने रहो"

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